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कौन बनेगा 'सारथी'!

Posted On: 22 Mar, 2014 Others में

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कभी इस दल को,कभी उस दल को अपना ही मान
चुनावी विगुल सुन गिरगिट से नेता खो रहे सम्मान
आज शिक्षित नौजवां की’वेरोज़गारी’ बन गई पहचान

जनता महंगाई से हुई आक्रांत,फिर भी नेता अंजान
आज दिख रही है दागी हर पार्टी, नहीं उतारों आरती
सोचो जनता, इन घने अंधेरों में कौन बनेगा सारथी

भोली जनता सोच रही ,उसने क्या खोया क्या पाएगी
बदलेसे मुखौटे में कांग्रेस कर विदा क्या मोदी लाएगी
देश को कंगाल बना, फिर भी बोट माँगते हाथ फैला
या फिर दागियों को साथले भ्रष्टतंत्र का कमल खिला

आज दिख रही भ्रष्ट हर पार्टी, नहीं उतारों अब आरती

कभी ‘समाजबादी’ हो भूखी जनता को नाच दिखाते हैं,
कभी दलितों के मसीहा बन साम-दाम से भरमाते हैं
मेरे देश की सोने की चिड़िया को भिखारिन बनाते हैं
अब फिर आश्वासन के सिंहासन-जनता तुझे बिठाते हैं

अब दिख रही दागी हर पार्टी,नहीं उतारों इसकी आरती
सोचो जनता इस घने अंधेरे में, कौन बनेगा अब सारथी

पहने फूलमालाएँ, चुनावी-समर में उतरवाते हैं आरतियाँ
नहीं जानते ये नेता,पीड़ित मानवता की सज़ाते अर्थियाँ
अभी समय रहते जाग ‘जनतंत्र’,कभी न नेता ये बदलेंगे
सत्ता पाते ही ये फिरसे भ्रष्टाचार की फसल को बो देंगे

दिख रही दागी हर पार्टी, अब नहीं उतारों इसकी आरती
सोचो जनता इस घने अंधेरे में कौन बनेगा अब सारथी

कहतें हैं, आर. टी आई का क़ानून निरीह जनता के लिए
सभी पार्टियाँ होंगी इससे दूर, सभी बिल बना एक हो लिए
नेताओं की इन धूर्त चालों से हम-सब आपस में ही लड़ेंगे
चुनावी-जीत के बाद ये फिर जातिबादी व सांप्रदायिक होंगे

दिख रही दागी हर पार्टी, नहीं उतारों अब इसकी आरती
सोचो जनता इस घने अंधेरे में, अब कौन बनेगा सारथी

अब फिर बिजली, पानी और गैस सभी के दाम बढ़ जाएँगे
दूध न पाकर मासूम दुधमुहे बालक भी अनछुए न रहेंगे
अपने पापों का प्रायश्चित लालची नेता कभी नही करेंगे
देश के संविधान की कसमे खानेवाले स्वार्थी उसे बदलेंगे

दिखा रही दागी अब हर पार्टी ,न उतारो इसकी आरती
सोचो जनता इस घने अंधेरे में अब कौन बनेगा ‘सारथी’!

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
June 14, 2014

आदरणीया ,सत्य कहा आप ने.सादर आभार रचना के लिए.

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 14, 2014

    पी.के.दूबे जी, आपका ब्लॉग पर आगमन हुआ ,एवं सभी रचनाओं में से आपने समसामयिक रचना ”सारथी” पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी , इस हेतु आपका हार्दिक आभार..कृपया सम्बाद बनाये रखियेगा ..

meenakshi के द्वारा
March 22, 2014

सोचो जनता इस घने अंधेरे में अब कौन बनेगा ‘सारथी’! अंतिम पंक्त बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है …पर कोई भी स्वच्छ और क़ाबिल नज़र आता नही …चुने तो किसे…? ये प्रश्न अनुत्तरित प्रतीत होता है… सुषमा जी जागरुकता भरा आलेख …बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Sushma Gupta के द्वारा
    March 24, 2014

    मीनाक्षी जी,प्रस्तुत रचना पर अपनी प्रतिक्रिया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद यदि,इस विषय पर आपको कोई सुझाव आये , अवश्य ही दीजियेगा …साभार |


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