Sushma Gupta's Blog

Writings and Thoughts of Sushma Gupta

59 Posts

622 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 11910 postid : 740293

''यह दिल माँगे मोर''

Posted On: 11 May, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

”यह दिल माँगे मोर
““““““““““““`
कल शाम जब चुनाव प्रचार थमा तो मन में बड़ा ही सुकून मिला,
महीनों से इस चुनावी-शोर से जी ऊब चुका था,कई महीनों से सड़क
से लेकर टेलीबिजन तक राजनीतिक बातों का ही ज़ोर था, जिसमे
सबसे अधिक गरमाया था..’अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा …..
रात्रि के प्रथम पहर में यही सब सोचते-सोचते कब निंद्रा ने मुझे
घेरा, पता ही ना चला…और फिर सपने में मैने अपने देश के भावी
प्रधान-मंत्री पद के उम्मीदवार मोदी जी को अपने घर के दरवाजे पे
पाया, तो भारतीय शिष्टाचारवश घर में उनका स्वागत करते हुए, जब
जल-पान और खाने में उनकी पसंद को जानना चाहा तो मोदी जी
तो जैसे इसी प्रश्न के इंतजार में ही थे….तपाक से बोले ..हां, बड़ी
भूख लगी है…मेरी थाली में मुझे तो बस ३०० कमल ही चाहिएं…
कुछ कमल कम न रह जाएँ, इसीलिए, बहन,’ये दिल माँगे मोर ‘
हैरान- परेशान होकर बोली..’ मोदी जी, इतनी रात को कमल कहाँ
मिलेंगे …अबतो आप कमल माँगना छोड़ दीजिए, यह आचारसंहिता
का उलंघन होगा…तब मोदी जी बोले आचारसंहिता का उलंघन ना हो
इसीलिए तो मैं अब कुछ लोगों के सपने में आकर बाकी बचे कमल
माँग रहा हूँ, तुम्हारे पास इसीलिए आया हूँ, कि बहन, तुम लेखनी के
द्वारा कुछ कमल खिला सको …सुनकर मैं कशम-कश में पड़ गई..कि
घर आए मेहमान की बात मानी जाए.. अथवा अपने ‘आप’ से किए..
वादे .. नहीं मैं पहले किए वादे ही …और मैं जैसे दो नावों के बीच
खड़ी डर गई थी…कि बस एकाएक आँखे ही खुल गईं…सामने कोई
न था फिर भी जैसे,अभी भी मुझे एक ही आवाज़ की गूँज सुनाई
पद रही थी…”यह दिल माँगे मोर” …

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
May 11, 2014

अलका जी , आपकी अमूल्य सार्थक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार..

alkargupta1 के द्वारा
May 11, 2014

सुषमाजी , वाह पढ़कर बड़ा ही आनंद आ गया दिल मांगे मोर में सभी कुछ कह दिया उत्कृष्ट लेखन के लिए बधाई

harirawat के द्वारा
May 11, 2014

सुषमा जी बहुत कम शब्दों में आपने बहुत कुछ कह दिया, चुनाव का माहोल हर सच्चे भारतवासी को ऐसे ही स्वप्ने आ रहे हैं ! मुझे तो मोदी जी की गॉड में ३०४ कमल के ताजे खिल खिलाते फूल नजर आए सुबह के ४,१० पर ! मैं गिनते गिनते ३०० पर पहुंचा की नींद खुल गयी ! धन्यवाद देता हूँ आपको !

    Sushma Gupta के द्वारा
    May 11, 2014

    आदरणीय हरी रावत जी , यह जानकर खुश हूँ की आपको भी बही सपना आया… सुन्दर प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार..


topic of the week



latest from jagran