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''गरीव का अपराध''

Posted On: 8 Jun, 2014 Others में

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विवाह के बाद पति के साथ घूमने के कुछ खुशनुमा यादगार पल होते

है , यही सब सोचते हुए मैं भी प्रातः की सुहावनी वेला में पति के साथ

नैनीताल जाने के लिए मुरादाबाद के बस-स्टेशन पर पहुंची ही थी कि

बहाँ सहसा एक बारह वर्ष के लड़के को बड़ी ही बेरहमी से तीन पुलिस -

कर्मियों द्वारा पीटते हुए देखा तो.जानकारी हुई कि उसने किसी सोये हुए

व्यक्ति की चप्पल पहन ली थीं , अब उसे चोर कहकर वे उसकी पिटाई

कर रहे थे.दर्द से चीखता बह लड़का उसे छोड़ने की गुहार लगाकर कह

रहा था वह बहुत गरीव है , परिवार से पिता का साया उसके बचपन में

ही उठ गया था , तब से वूडी माँ और बहन के लिए एकमात्र वही सहारा

है, गरीवी के कारण ही वह चप्पल नहीं खरीद सकता है, इसीलिए उसने

यह अपराध किया है , परन्तु पुलिस-कर्मियों ने उसकी एक ना सुनी और

उसे लगातार पीटते रहे ,जबतक उसने अपनी चेतना न खो दी….. तब

तक भीड़ भी एकत्र हो गई थी ,परन्तु सभी मूकदर्शक थे ,अचानक मेरे

अंदर की चेतना जाग उठी और मैंने उन लोगों से उस बालक को छोड़ देने

की गुहार लगाईं , तो उनमें से एक पुलिस बाला बोला,” मैडम आप इसके

बीच में ना पडे….. यह लोग बड़े शातिर होते हैं और ऐसे पिटाई से ही

मानते हैं , अभी तो इसे थाने ले जाएंगे ,वहां भी पिटेगा” तब सहसा मैं

कह उठी ,”यदि कोई इसकी जगह रईसजादा होता ,तब भी यही प्रक्रिया

अपनाते ” और आज देश में जो बड़े-बड़े सफेदपोश अपराधी हैं ,जिन्होंने

हमारे देश की समृद्धि की जड़ो को ही हिला दिया है, उनको क्यों सरेआम

नहीं पीटते ? बात कुछ-कुछ समझ आने पर उन्होंने उस बालक को तो

छोड़ दिया, पर यह बात वर्षों पुरानी होने पर भी आज भी आँखों के समक्ष

आती है, और एक प्रश्न मन में छोड़ जाती है कि इस देश में बड़े-बड़े शातिर

अपराधी अब भी वेखौफ़ क्यों घूम रहें हैं???

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
June 15, 2014

सुरेन्द्र जी नमस्कार, आपकी गरीबों के प्रति सम्बेदन-पूर्ण प्रक्रिया आज समाज के हर व्यक्ति को यही सन्देश देती है कि अन्याय चाहे किसी के प्रति भी हो,विशेषतः समाज के दवे या पिछड़े लोगों को न्याय दिलाने के लिए हमसभी को एक सक्रीय भूमिका समय पूर्व ही निभानी चाहिए ..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 14, 2014

और आज देश में जो बड़े-बड़े सफेदपोश अपराधी हैं ,जिन्होंने हमारे देश की समृद्धि की जड़ो को ही हिला दिया है, उनको क्यों सरेआम नहीं पीटते ? बात कुछ-कुछ समझ आने पर उन्होंने उस बालक को तो छोड़ दिया, पर यह बात वर्षों पुरानी होने पर भी आज भी आँखों के समक्ष आती है, जी यही हालात हैं सुषमा जी पुलिस वाले पहले तो अपने थाने के अपराध ग्राफ को नीचे रखने के लिए प्राथमिकी दर्ज नहीं करते आप ज्यादा होशियार और पढ़ाई लिखाई की बात किये तो इतना तंग करेंगे की लोग भाग ही जाए चोरी हो तो भोले भाले को पकड़ लेंगे या मुर्गी चोर को शातिर अपराधी ..आप जैसे नागरिक की जरुरत बहुत है ..गरीब ही व्यथा झेलने को पैदा हुए हैं ? सुन्दर संस्मरण .. भ्रमर ५

Sushma Gupta के द्वारा
June 13, 2014

आपकी प्रसंसनीय एवं प्रेरक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार समर पठान जी ..

samarpathan के द्वारा
June 13, 2014

I really I appreaciate! you are doing well keep it up………..!!! god bless you in your aim. go ahead peple will join the hand and it will be a great movement !

Sushma Gupta के द्वारा
June 13, 2014

योगी जी नमस्कार , ”गरीव के अपराध ” पर आपकी विवेचना उचित व् समसामयिक है ” परन्तु मैं ”अच्छे दिन” आएंगे ,कहकर जनमत लेने बाले नेताओं को अब सर्वप्रथम गरीवों के प्रति न्याय-प्रिय बनना ही होगा , और सामंती -प्रथा पर लगाम कसनी ही होगी , वरना जनता इन्हें भी नकार देगी …

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 12, 2014

एक शुभ सन्देश देता सटीक लघुकथात्मक संस्मरण के लिए सुषमा जी बधाई ! सादर !

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 13, 2014

    आचार्य गुंजन जी नमस्कार , आपकी प्रेरणीय व् उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार..

sadguruji के द्वारा
June 10, 2014

बहुत मार्मिक घटना का आपने वर्णन किया है ! बच्चे को पुलिस के चंगुल से बचाने के लिए बहुत सराहनीय प्रयास आपने किया ! उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये वो कम है ! पूरे देशभर की पुलिस की सोच यही है कि गरीब आदमी चोर,बदमाश,गुंडा और शातिर अपराधी होता है ! पुलिस की इस सोच को और उसकी तालिबानी कार्यपद्धति को अब बदलने की जरुरत है ! ये काम सरकार ही कर सकती है ! जेलों में सौ दो सौ रूपये की मामूली चोरी के अपराध में असंख्य बच्चे बंद हैं ! कोई उनकी जमानत कराने वाला नहीं है ! आपने मानवीय और मार्मिक विषय से सम्बंधित अपनी एक स्मृतिं प्रस्तुत की ! जो ह्रदय को स्पर्श कर गई ! बहुत बहुत बधाई !

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 11, 2014

    सदगुरू जी नमस्कार, आपकी बहुत ही सकारात्मक चिंतन-पूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, इस हेतु मैं आपकी आभारी हूँ , मैं इन गरीवों और समाज के ही ठेकेदारों द्वारा सताए हुए हर व्यक्ति की मदद के लिए सदैव तत्पर हूँ,और ऐसा ही समाज के हर व्यक्ति से कामना करती हूँ ..

deepak pande के द्वारा
June 9, 2014

BAHUT KHOOB AAJ HAMAARI INSAANIYAT TO LAGBHAG MAR HEE CHUKEE HAI AADARNIYA SUSHMA JEE APKO SADAR NAMAN

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 10, 2014

    दीपक जी नमस्कार, सही कहा आपने इंसानियत आज मर रही है, इसे जगाने के लिए हम्मे से ही किसी को पहल करनी ही पड़ेगी .. कबतक हम एक भीड़ का मात्र एक हिस्सा बने रहेंगे ? आपकी सार्थक प्रतिक्रिया हेतु बहुत -बहुत हार्दिक आभार ..

jlsingh के द्वारा
June 9, 2014

aadarneeyaa sushama ji, आपकी हिम्मत और जज्बे को नमस्कार … आए दिन हम इस तरह की घटनाओं को होते चुपचाप देखते रहते हैं ..अगर जोश में आए तो अपना हाथ भी saaf कर लेते हैं. कब आएगी सामाजिक चेतना और जागरूकता ? हम sabhi भी barabar के भागीदार हैं जो सामने हो रहे अपराध के सामने सर jhukakar chal देते हैं.

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 10, 2014

    जे.एल.सिंह जी , यदि हम मात्र भीड़ का हिस्सा न बनकर किसी पर भी हो रहे अत्याचारों का विरोध करेंगें , तभी सबमें कुछ तो जागरूकता अवश्य ही आएगी , मैं तो बचपन से ही निडर हूँ ..किसी भी गलत बात को नहीं सह पातीं हूँ .. आपकी सार्थक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार..

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 8, 2014

सच कहा आपने .गरीब व्यक्ति के प्रति हमारा समाज सदा से नैतिकता का झंडा लेकर खड़ा हो जाता है और अमीर के बड़े से बड़े अपराध पर चुप्पी साध लेता है .

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 10, 2014

    शिखा जी नमस्कार,सार्थक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार …. अब वक्त आ गया है कि हम स्वयं आगे बढ़कर समाज में जागरूकता लाएं, जिससे देश में हो रहा गरीवों का शोषण तत्काल रोका जा सके ..

June 8, 2014

aapki post ko padhkar mere man me bhi yahi khyal aa rahe the par aapki post poori hone tak sab saaf ho gaya ki aap bhi vahi soch rahi thi jo maine socha kintu ye police aur prashasan vale ye sab kab sochenge pata nahi .nice post .thanks

    Sushma Gupta के द्वारा
    June 10, 2014

    शालिनी जी, आपने सही कहा कि यह एक सोचनीय विषय है , लेकिन इस ओर पहल हमें ही करनी चाहिए ..तभी समस्या को हम समाधान कि ओर ले जा सकेंगे ..


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