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''शौक ए मौहब्बत''[ ग़ज़ल ]

Posted On: 8 Jul, 2014 Others में

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हर किरदार में ”शौक ए मौहब्बत” की जुदा ‘तासीर’होती
कभी यह दिली हमदम तो कमबख्त कभी ”वेबफ़ा” होती
हरअक्श में नजर आये खुदा तो बस उसी का ”नूर” होती
गरलौ लगाली ‘साहिव’ से तो सिर्फ़ उसीकी ”बंदगी” होती
फ़िजा में खुशबू रिश्तोंकी महके तो इक हसीं ”फूल” होती
पड़ जाए किसी जालिम के गिरेवां में तो’सुपुर्देखाख़’ होती
गिरे ग़र किसी गरीब की चौखट पे तो ”सरपरस्त” होती
दिलों में मज़ाक की खातिर महज़ एक ”आवारगी” होती
क़द्र करे ग़ैरों की खुद से भी ज़यादा तो बड़ी”मेहरबाँ”होती
बांटे जो धर्म के नाम पे तो उस मुल्क की वो”तौहीन”होती
बने यतीमों का सहारा तो जमी पे ही ”इनायतें खुदा” होती
राहे-मंजिलों में गर छोड दे आशिक को तो ”वेवफ़ा” होती
जमाने की ख़ातिर मिटादे वज़ूद खुद का तो ”तारीफ़” होती
ख़ालिश हो जाए गर हुस्न की दीवानी तो ”शर्मिंदगी” होती
गूँजते हर दिल ‘शौक ए मौहब्बत’ तराने तो हमसफ़र होती

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 13, 2014

बने यतीमों का सहारा तो जमी पे ही ”इनायतें खुदा” होती, वाह सुषमा जी बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,हार्दिक बधाई.

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 14, 2014

    निर्मला जी, आपने यथार्थता के आधार पर सुन्दर प्रतिक्रिया दी इस हेतु हार्दिक आभार आपका..

sadguruji के द्वारा
July 11, 2014

आदरणीया सुषमा गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! सबसे पहले ग़ज़ल लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई ! आपने विषय बहुत अच्छा चुना है ! परन्तु पूरी तरह से लय में नहीं होने के कारण शेरों में वजन नहीं आ पाया है ! आपने प्रयास बहुत अच्छा किया है !

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 12, 2014

    आदरणीय सदगुरु जी नमस्कार, मार्गदर्शन हेतु हार्दिक आभार..

sanjay kumar garg के द्वारा
July 11, 2014

आदरणीय सुषमा जी, सुन्दर गजल के लिए हार्दिक बधाई!

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 11, 2014

    संजय कुमार जी,ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन व् आभार..

Imam Hussain Quadri के द्वारा
July 9, 2014

एक कूज़े में समंदर को समाया है आपने हर नफरत को मोहब्बत से सजाया है आपने खालिस हो जाए काश प्रेम हम सबको सबसे आज यही सबक सबको सिखाया है आपने बहुत खूबसूरत और सबक आमोज़ ग़ज़ल है शुक्रिया

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 9, 2014

    इमाम हुसैन क़ादरी जी,ब्लॉग पर आने और गजल की पसंदगी के लिए तहे दिल से आपको शुक्रिया ..

    jlsingh के द्वारा
    July 18, 2014

    एक कूज़े में समंदर को समाया है आपने, हर नफरत को मोहब्बत से सजाया है, आपने खालिस हो जाए काश प्रेम हम, सबको सबसे आज यही सबक सबको सिखाया है आपने वह वाह कादरी साहब, इसी बहाने गजल कहना सिखाया है आपने ..

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 18, 2014

    जे.एल.सिंह जी..”आपकी मिली-जुली सराहना लाजवाव है, देखते ही मिल गया पता, जो वेहिसाव है ” बहुत समय बाद ब्लॉग पर आने हेतु हार्दिक आभार… सम्बाद बनाये रखियेगा..

deepak pande के द्वारा
July 8, 2014

KHOOBSURAT GAZAL SUSHMA JEE फ़िजा में खुशबू रिश्तोंकी महके तो इक हसीं ”फूल” होती पड़ जाए किसी जालिम के गिरेवां में तो’सुपुर्देखाख़’ होती

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 9, 2014

    दीपक पाण्डेय जी, आपको गजल पसंद आई, आपका दिल से बहुत आभार..

July 8, 2014

sundar bhavon se gazal sanjoyi hai aapne sushma ji .thanks

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 9, 2014

    शालिनी जी, प्रसंसा के लिए मैं आपकी दिल से आभारी हूँ …

amarsin के द्वारा
July 8, 2014

बहुत सुन्दर गजल.

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 9, 2014

    अमरसिन जी, आपका पहली बार ब्लॉग पर आने और एक सुन्दर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत आभार..

pkdubey के द्वारा
July 8, 2014

बहुत शिक्षाप्रद ग़ज़ल आदरणीया.सादर आभार और बधाई.

    Sushma Gupta के द्वारा
    July 9, 2014

    पी.के.दूबेजी, ब्लॉग पर आकर प्रसंसापूर्ण प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार..


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