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''शिक्षक-दिवस पर गीत-मुक्तिका''

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शिक्षक तुम ही जीवन के ‘सूत्रधार’ हो
शिक्षा की ज्योति से भरते ‘संसार’ हो

शिक्षक तुम ही तो एक ‘शिल्पकार’ हो
गड़ते तुम तो भविष्य के ‘कर्णधार’ हो

शिक्षक तुम तो सच्चे ‘जीवनाधार’ हो
प्राण फूँकते ‘प्रज्ञा’ से, प्राणो के सार हो

शिक्षक तुम आत्म-वल,औ सम्मान हो
गौरव-विकास देश के ही’शक्तिमान’ हो

शिक्षक तुम धरा से नभ तक’पहचान’हो
विज्ञान से ग्रहों तक जाने बाले महान हो

शिक्षक तुम ‘प्रज्ञा-उपवन’ के ‘माली’ हो
रंग-बिरंगी दुनियाँ की खिलती ‘जान’ हो

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
September 15, 2014

शिक्षक तुम ही जीवन के ‘सूत्रधार’ हो शिक्षा की ज्योति से भरते ‘संसार’ हो शिक्षक तुम ही तो एक ‘शिल्पकार’ हो गड़ते तुम तो भविष्य के ‘कर्णधार’ हो ! आदरणीया सुषमा गुप्ता जी ! बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना ! शिक्षक दिवस पर सादर अभिनन्दन और बधाई !

    Sushma Gupta के द्वारा
    September 16, 2014

    आ. सद्गुरु जी, आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक सादर आभार एवं आपको भी शिक्षक-दिवस की शुभकामनाएं..

pkdubey के द्वारा
September 5, 2014

हाँ आदरणीया शिखक अवश्य ही एक होकर भी अनेक रूपों से विचरण कर रहा है,जो भी समाज में अच्छा हो रहा ,वह किसी महान शिक्षक की ही प्रेरणा से हो रहा है | सादर आभार,साधुवाद |

    Sushma Gupta के द्वारा
    September 7, 2014

    आ.पी.के.दूबे जी नमस्कार.. सर्वप्रथम आपको शिक्षक-दिवस पर अनेकानेक शुभकामनाएं एवं एक सार्थक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार..


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