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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विचार-

Posted On: 8 Mar, 2015 Others में

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यह शाश्वत सत्य है कि ‘नारी’ ही ‘समस्त सृष्टि स्वरूपा’ है, अर्थात समस्त चराचर
जगत नारी के ही अधीन कहा जाए तो अतिशयोक्ति ना होगी,परन्तु विडंबना यही
है कि यह जानकर भी एक ओर तो नारी को पूज्यनीय कहकर उसे शक्ति स्वरुप में
पूजा जाता है, तो बहीं दूसरी ओर सदियों से पुरुष अपना वर्चस्व दिखाकर उसपर विविध
अनैतिक अत्याचार करता आ रहा है,समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर
चलने बाली नारी आज भी उपेक्षित व् कहीं-कहीं प्रताड़ित हो रही है,लेकिन क्यों? क्या
यह विरोधाभास समाज की दुर्वल मानसिकता का परीचायक तो नहीं ? आज भी नारी
को अबला और स्वयं पर निर्भर मानकर पुरुष उसपर अपनी मनमानी करना ही अपना
जन्मसिद्ध अधिकार समझता है, जबकि हम पत्नी को अर्धागिनी[बेटर हॉफ ] अर्थात
बेहतर आधा कहते हैं, फिर भी उसे कमतर आधा समझने की सोच अपनाते हैं. आज
विश्व में नारी हर क्षेत्र में पुरुषों से भी अग्रणीय है,हर क्षेत्र में उसको दक्षता प्राप्त है,
चाहे बह शिक्षा हो या व्यापार अथवा राजनीति..नारी में एक परम गुण विधाता ने यह
भी दिया है कि उसमें सहनशीलता और दुःख-दर्द सहने की असीम शक्ति होती है,
परन्तु जब नारी-शक्ति जागृत हो जाती है तब समस्त जगत को उसका आभास हो
ही जाता है, अतः ‘नारी’ का सम्मान करना ही ” महिला दिवस ” की सार्थकता है ,आज
भी जब बह जन्म लेती है और जबतक उसका विवाह होता है, तबतक बह उसके ‘पिता
का घर’ कहा जाता है, और जब ससुराल जाती है तब भी बह घर ‘ पति ‘ का कहा जाता
है , तो ऐसे में उस वेचारी का तो इस धरती पे कोई घर ही नहीं है, जबकि यह भी सत्य
है ‘नारी के बिना घर नहीं बनता, बल्कि एक कहावत में कहा भी गया है कि ”बिन घरनी
घर भूत का डेरा” इसलिए मेरा समस्त पुरुष-समाज से विनम्र आग्रह है कि इस तथ्य
का वे गंभीर चिंतन करें, घर बड़े-बुजुर्गों का भी यही कहना था कि” नारी ही घर की लक्ष्मी होती है,यदि हम घरमें नारी का सम्मान करेंगे तो हमारे घरों में सदैव ही लक्ष्मी
का वास रहेगा,और फिर घर में सुख, समृध्धि एवं शान्ति का वास होगा , जिसका सुखद एवं
सार्थक प्रभाव हमारी आने बाली पीड़ियों पर भी अवश्यम्भावी होगा..”

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